Congress का Election Commission के बाहर प्रदर्शन
Election Commission के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन: उत्तराखंड SIR को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद
नई दिल्ली | 21 अगस्त 2026
उत्तराखंड की मतदाता सूची में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद तेज हो गया है। 20 अगस्त 2026 को कांग्रेस नेताओं ने नई दिल्ली स्थित Election Commission of India (ECI) के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। कांग्रेस का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस ने प्रदर्शन क्यों किया?
कांग्रेस का कहना है कि उसने उत्तराखंड की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग को ज्ञापन देना और अधिकारियों से मुलाकात करना चाहा था।
पार्टी के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल को आयोग के कार्यालय में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने कार्यालय के बाहर धरना और प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह, करण माहरा, हरक सिंह रावत, गुरदीप सिंह सप्पल, पवन खेड़ा और काजी निजामुद्दीन समेत कई नेता शामिल हुए।
कांग्रेस के मुख्य आरोप क्या हैं?
कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया में कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
पार्टी का दावा है कि:
- पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं।
- कुछ लोगों को “absent” या “shifted” बताया गया है, जबकि वे वहां रहते हैं।
- कुछ युवा मतदाताओं को कथित तौर पर “deceased” यानी मृत बताया गया।
- कुछ लोगों के नाम से मतदाता हटाने के लिए आवेदन किए गए, जबकि संबंधित व्यक्ति को इसकी जानकारी ही नहीं थी।
- कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम से बड़ी संख्या में deletion applications दाखिल होने का आरोप है।
कांग्रेस ने इन आरोपों को चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए गंभीर खतरा बताया है।
महत्वपूर्ण: ये फिलहाल कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोप हैं। इन्हें चुनाव आयोग द्वारा प्रमाणित चुनावी धांधली के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।
“Vote Chori” का मुद्दा फिर उठा
कांग्रेस ने इस विवाद को अपने बड़े राजनीतिक अभियान “Vote Chori” से भी जोड़ा है।
उत्तराखंड कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि SIR के माध्यम से मतदाता सूची में बदलाव का असर आगामी चुनाव पर पड़ सकता है। उन्होंने चुनाव आयोग से निष्पक्ष जांच और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग की।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि ऐसी गतिविधियों का फायदा सत्तारूढ़ BJP को मिल सकता है।
हालांकि, BJP द्वारा मतदाता सूची में कथित हेरफेर किए जाने का आरोप अभी राजनीतिक आरोप है; उपलब्ध रिपोर्टों में इसे स्थापित तथ्य के रूप में साबित नहीं किया गया है।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया क्या है?
इस पूरे विवाद के बीच उत्तराखंड के Chief Electoral Officer (CEO) कार्यालय ने कांग्रेस के साथ बातचीत का रास्ता खोला है।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल को CEO कार्यालय ने SIR से जुड़े उनके सवालों और आपत्तियों पर चर्चा के लिए 21 अगस्त को दोपहर 3 बजे प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक का निमंत्रण दिया है।
यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे विवाद को सड़क के प्रदर्शन से आगे बढ़ाकर आधिकारिक शिकायत और जवाब की प्रक्रिया में ले जाने का अवसर मिल सकता है।
SIR आखिर क्यों महत्वपूर्ण है?
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है।
इस प्रक्रिया में चुनाव अधिकारी यह पहचानने की कोशिश करते हैं कि:
कौन पात्र मतदाता है?
कौन स्थायी रूप से दूसरी जगह चला गया है?
कौन मृत हो चुका है?
कहां duplicate voter entry है?
समस्या तब पैदा हो सकती है जब verification के दौरान किसी वास्तविक मतदाता को गलती से absent, shifted या deceased दर्ज कर दिया जाए।
इसी वजह से claims और objections की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है।
राजनीतिक विवाद इतना बड़ा क्यों है?
उत्तराखंड में आने वाले चुनावों को देखते हुए मतदाता सूची का महत्व बहुत बढ़ जाता है।
यदि हजारों मतदाताओं के नाम हटते हैं या जुड़ते हैं, तो इसका असर कई विधानसभा क्षेत्रों के चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है।
इसलिए विपक्ष चाहता है कि:
हर deletion का कारण स्पष्ट हो।
मतदाता को उचित notice मिले।
गलत deletion के खिलाफ प्रभावी appeal mechanism हो।
सभी राजनीतिक दलों को verification प्रक्रिया पर पर्याप्त जानकारी मिले।
क्या SIR का मतलब मतदाता का वोट हमेशा के लिए खत्म होना है?
नहीं।
किसी draft electoral roll में नाम न मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि व्यक्ति हमेशा के लिए मतदान के अधिकार से बाहर हो गया है।
मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम शामिल कराने या रिकॉर्ड में सुधार की मांग कर सकता है।
इसीलिए draft roll के बाद claims and objections का चरण महत्वपूर्ण होता है।
कांग्रेस के प्रदर्शन का राजनीतिक संदेश
कांग्रेस के लिए यह प्रदर्शन केवल उत्तराखंड की मतदाता सूची का मामला नहीं है।
पार्टी इसे देशभर में चुनाव आयोग की भूमिका, electoral transparency और voter rights को लेकर चल रहे अपने व्यापक अभियान का हिस्सा बना रही है।
कांग्रेस का संदेश है कि “एक भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए।”
दूसरी ओर चुनाव आयोग के लिए चुनौती यह है कि वह SIR के उद्देश्य—मतदाता सूची को साफ और सटीक बनाना—को पूरा करते हुए यह भी सुनिश्चित करे कि वास्तविक मतदाताओं के नाम सुरक्षित रहें।
सबसे बड़ा सवाल: क्या आरोप साबित होंगे?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर जानबूझकर वोट हटाए जा रहे हैं।
इसके लिए प्रत्येक शिकायत की जांच जरूरी होगी।
यदि कांग्रेस द्वारा बताए गए मामलों में यह साबित होता है कि किसी व्यक्ति के नाम से उसकी जानकारी के बिना deletion application दाखिल हुई, तो यह गंभीर प्रशासनिक और चुनावी चिंता होगी।
लेकिन यदि verification में पता चलता है कि अधिकांश deletions मृत, स्थानांतरित या duplicate मतदाताओं के हैं, तो SIR का उद्देश्य पूरा माना जा सकता है।
अंतिम निष्कर्ष claims, objections और official verification के बाद ही अधिक स्पष्ट होगा।
आगे क्या होगा?
अब तीन घटनाक्रम महत्वपूर्ण हैं:
1. CEO Uttarakhand और कांग्रेस की बैठक
कांग्रेस अपनी शिकायतों और दस्तावेजों को चुनाव अधिकारियों के सामने रख सकती है।
2. संदिग्ध deletion applications की जांच
जिन आवेदनों पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं, उनकी वास्तविकता जांची जा सकती है।
3. Draft और Final Electoral Roll
आगे आने वाली मतदाता सूची से पता चलेगा कि कितने नाम हटे, कितने वापस जुड़े और कितने मामलों में correction हुआ।
Election Commission के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन उत्तराखंड SIR को लेकर बढ़ते राजनीतिक टकराव का संकेत है।
कांग्रेस का आरोप है कि SIR में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और कुछ deletion applications संदिग्ध हैं।
वहीं, इस विवाद का समाधान राजनीतिक आरोपों से नहीं बल्कि मतदाता-स्तर पर सत्यापन, पारदर्शी रिकॉर्ड और प्रभावी claims-and-objections प्रक्रिया से होगा।
आने वाली जांच और चुनाव आयोग की कार्रवाई इस सवाल का जवाब तय करेगी।