📱 सोशल मीडिया पर और सख्ती की तैयारी
नई दिल्ली, 24 अगस्त 2026: भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाने को लेकर सरकार और संसदीय समिति की सक्रियता तेज हो गई है। एक उच्चस्तरीय संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि अगर सोशल मीडिया कंपनियां कानूनी आदेश के बावजूद आपत्तिजनक या गैरकानूनी सामग्री तय समय में नहीं हटाती हैं, तो उनके खिलाफ कड़े कानूनी और आर्थिक दंड का प्रावधान किया जाए।
🔴 क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?
समिति ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 में आवश्यक संशोधन पर विचार करने की बात कही है। प्रस्तावित व्यवस्था में:
- कानूनी आदेशों का पालन नहीं करने पर graded penalties यानी अपराध की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग दंड।
- बार-बार नियम तोड़ने वाले प्लेटफॉर्म पर भारी जुर्माना।
- लगातार गैर-अनुपालन की स्थिति में प्लेटफॉर्म के संचालन को निलंबित करने जैसे कदम पर भी विचार।
- शिकायतों और कार्रवाई के लिए due process और appeal mechanism बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर।
⚠️ किन कंटेंट पर ज्यादा नजर?
समिति ने फर्जी प्रोफाइल, मॉर्फ्ड वीडियो, misinformation और धर्म या जाति के आधार पर हिंसा भड़काने वाले कंटेंट को गंभीर चिंता का विषय बताया है। कुछ मामलों में सोशल मीडिया कंपनियों पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पर्याप्त सहयोग नहीं करने का भी आरोप लगाया गया है।
🏛️ सरकार पहले से क्या कर रही है?
सरकार ने जुलाई 2026 में भी सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म्स को IT Rules, 2021 के तहत अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का पालन करने की याद दिलाई थी। सरकार का कहना है कि इंटरनेट को सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाना लक्ष्य है, खासकर महिलाओं और बच्चों को हानिकारक ऑनलाइन कंटेंट से बचाने के लिए।
🗣️ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल
इस पूरी बहस का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष फ्री स्पीच है। सरकार और समिति जहां गैरकानूनी, हिंसक और भ्रामक कंटेंट पर कार्रवाई की जरूरत बता रही हैं, वहीं किसी भी नए नियम में यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि वैध राजनीतिक आलोचना, पत्रकारिता और सामान्य अभिव्यक्ति पर अनावश्यक रोक न लगे। संसदीय समिति ने भी अपील और उचित प्रक्रिया बनाए रखने की बात कही है।
निष्कर्ष: फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि सोशल मीडिया पर कोई नया व्यापक प्रतिबंध लागू हो गया है। सख्त जवाबदेही और दंड के लिए सिफारिशें सामने आई हैं, जबकि आगे का रास्ता सरकार के निर्णय और संभावित कानूनी संशोधनों पर निर्भर करेगा।