☸️ डॉ. अंबेडकर ने बौद्ध धर्म कब और क्यों अपनाया?
डॉ. भीमराव अंबेडकर ने बौद्ध धर्म 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में अपनाया। इस अवसर को आज धम्म दीक्षा समारोह के रूप में याद किया जाता है। उनके साथ बड़ी संख्या में उनके अनुयायियों ने भी बौद्ध धर्म ग्रहण किया।
उन्होंने बौद्ध धर्म क्यों अपनाया?
- जातिगत भेदभाव का विरोध — अंबेडकर ने अपने जीवन में अस्पृश्यता और जातिगत भेदभाव का सामना किया था। उनका सामाजिक संघर्ष समान नागरिक अधिकारों और सम्मान पर केंद्रित था।
- समानता और सामाजिक न्याय — वे ऐसी धार्मिक-सामाजिक व्यवस्था चाहते थे जिसमें व्यक्ति की सामाजिक स्थिति जन्म के आधार पर तय न हो।
- लंबे समय तक धर्मों का अध्ययन — उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाने का निर्णय अचानक नहीं लिया; उन्होंने कई वर्षों तक बौद्ध विचारों का अध्ययन किया था।
- बौद्ध धर्म को सामाजिक परिवर्तन से जोड़ना — अंबेडकर ने बौद्ध विचारों को स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे सामाजिक मूल्यों के साथ जोड़ा। उनके विचारों से आगे चलकर नवयान (Navayana) बौद्ध आंदोलन विकसित हुआ।
📅 महत्वपूर्ण तारीखें
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1935 | अंबेडकर ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे हिंदू धर्म में रहते हुए नहीं मरेंगे। |
| 1950s | उन्होंने विभिन्न धर्मों का अध्ययन किया और बौद्ध धर्म की ओर अधिक ध्यान दिया। |
| 14 अक्टूबर 1956 | नागपुर में बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। |
| 6 दिसंबर 1956 | उनका निधन दिल्ली में हुआ। |
सरल शब्दों में: अंबेडकर के लिए बौद्ध धर्म अपनाना केवल धार्मिक परिवर्तन नहीं था; यह उनके सामाजिक समानता और जातिगत भेदभाव के विरोध से जुड़ा निर्णय था।
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