ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में कहाँ-कहाँ कितने वोट कटे?
- मतदाता सूची से कितने नाम हटाए गए।
- हटाए गए नामों में मृतक, स्थानांतरित और डुप्लिकेट मतदाता कितने थे।
- कितने नामों को लेकर राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई।
- किन मामलों में जाँच या आधिकारिक पुष्टि हुई।
1. राज्यवार मतदाता सूची में कमी
नीचे उपलब्ध रिपोर्टों में दिए गए आँकड़े हैं। ये सभी एक ही चरण या एक ही तारीख के आँकड़े नहीं हैं, इसलिए इन्हें सीधे एक-दूसरे से तुलना नहीं करना चाहिए।
| राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | हटाए गए या कम हुए नाम |
|---|---|
| बिहार | लगभग 47 लाख की शुद्ध कमी |
| उत्तर प्रदेश | 2.89 करोड़ नाम मसौदा सूची से हटे |
| पश्चिम बंगाल | लगभग 91 लाख नाम हटे |
| दिल्ली | मसौदा सूची से लगभग 47.6 लाख नाम हटे |
स्रोत: Business Standard की 20 जुलाई 2026 की राज्यवार रिपोर्ट। नीचे दिए गए आँकड़े SIR शुरू होने से अंतिम मतदाता सूची तक की शुद्ध कमी हैं—सिर्फ हटाए गए नामों की कुल संख्या नहीं।
| राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | शुद्ध कमी | प्रतिशत |
|---|---|---|
| बिहार | 47 लाख | लगभग 6% |
| उत्तर प्रदेश | 2.04 करोड़ | 13.21% |
| पश्चिम बंगाल | 88.9 लाख | 11.6% |
| छत्तीसगढ़ | 25 लाख | 11.8% |
| राजस्थान | 31.4 लाख | 5.74% |
| तमिलनाडु | 74 लाख | 11.5% |
| केरल | 8.97 लाख | 3.22% |
| गुजरात | 68.1 लाख | 13.4% |
| मध्य प्रदेश | 34.3 लाख | 5.97% |
| गोवा | 1.27 लाख | 10.76% |
| पुडुचेरी | 77,367 | 7.57% |
| अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह | 52,364 | 16.87% |
| लक्षद्वीप | 206 | 0.36% |
2. कुल कितने नाम कम हुए?
इन पहले दो चरणों में शामिल 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की मतदाता सूचियों में कुल मिलाकर लगभग 5.84 करोड़ की शुद्ध कमी दर्ज की गई। इस गणना में नए जोड़े गए मतदाताओं को भी समायोजित किया गया है।
3. क्या यह साबित करता है कि फ्रॉड हुआ?
नहीं। इन आँकड़ों से केवल मतदाता सूची में बदलाव का पता चलता है। यह साबित करने के लिए कि किसी जगह गलत तरीके से पात्र मतदाताओं के नाम काटे गए, उस जगह की हटाए गए नामों की सूची, हटाने के कारण, आपत्तियों और अपीलों के नतीजों की जाँच करनी होगी।
चुनाव आयोग के अनुसार, नाम हटाने के कारणों में मृत्यु, स्थायी रूप से स्थानांतरण, डुप्लिकेट प्रविष्टियाँ और बार-बार प्रयास के बाद भी मतदाता का पता न चलना शामिल
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