गांधी जी धोती और कुर्ता क्यों पहनते थे
महात्मा गांधी ने विदेशी कपड़ों का त्याग कर धोती (और साधारण वस्त्र) अपनाना 22 सितंबर 1921 को मदुरै (तमिलनाडु) में शुरू किया था। वे देश के गरीबों के साथ एकता दिखाने, स्वदेशी और खादी को बढ़ावा देने तथा ब्रिटिश राज के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए ऐसा करते थे।
मुख्य कारण
- गरीबों से जुड़ाव: भारत के अधिकांश किसान और मजदूर पूरा शरीर ढकने वाले कपड़े या महंगे विदेशी वस्त्र नहीं खरीद सकते थे। गांधीजी ने महसूस किया कि जब तक वे देश के आम और गरीब नागरिक जैसे नहीं दिखेंगे, तब तक वे खुद को पूरी तरह से जनता से नहीं जोड़ पाएंगे।
- विदेशी कपड़ों का बहिष्कार: ब्रिटिश सरकार भारत से कच्चा कपास ले जाती थी और वहां से महंगे कपड़े बनाकर भारत में बेचती थी। इसका विरोध करने और स्वदेशी ‘खादी’ अपनाने के लिए उन्होंने पारंपरिक और साधारण भारतीय पहनावा चुना।
- राजनीतिक विरोध का प्रतीक: उनकी यह सरल वेशभूषा ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ एक शक्तिशाली राजनीतिक संदेश और शांतिपूर्ण आंदोलन का हिस्सा बन गई, जिसे उन्होंने जीवनभर नहीं बदला।