📱 पुलिस जबरदस्ती मोबाइल का पासवर्ड/फोन का लॉक खुलवाने को कहे तो आम आदमी के क्या अधिकार हैं?
भारत में पुलिस द्वारा मोबाइल फोन जब्त करना और आपसे पासवर्ड/PIN बताकर फोन unlock करवाना दो अलग कानूनी सवाल हैं। वर्तमान कानून में पुलिस को अपराध की जांच के दौरान फोन जैसे electronic device को जब्त करने की शक्ति हो सकती है; BNSS की धारा 105 search/seizure की audio-video recording और धारा 106 कुछ परिस्थितियों में property seizure का प्रावधान करती है।
🔐 अगर पुलिस PIN/Password बताने के लिए दबाव डाले
- सिर्फ फोन जब्त किए जाने से यह अपने-आप साबित नहीं होता कि आपको PIN बताना ही होगा।
- भारतीय संविधान का Article 20(3) किसी आरोपी को अपने ही विरुद्ध साक्ष्य देने के लिए compelled होने से सुरक्षा देता है। Supreme Court का Selvi v. State of Karnataka फैसला इस protection और “testimonial compulsion” के सिद्धांत से महत्वपूर्ण है।
- लेकिन पासकोड, biometric (fingerprint/Face ID), और फोन की forensic examination के बारे में भारतीय न्यायालयों में अलग-अलग factual situations पर प्रश्न उठते रहे हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर परिस्थिति में पुलिस को PIN देने से पूर्ण कानूनी छूट है।
- यदि आपसे फोन unlock करवाने के लिए धमकी, मारपीट या जबरदस्ती की जा रही है, तो उस स्थिति को अलग से चुनौती दी जा सकती है।
👮 उस समय आम व्यक्ति क्या करे?
शांत रहें और कह सकते हैं:
“मैं जांच में सहयोग कर रहा हूं। कृपया बताएं कि फोन किस मामले में और किस कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया जा रहा है। मैं अपने वकील से कानूनी सलाह लेना चाहता हूं।”
अगर फोन जब्त किया जाता है, तो seizure memo/रसीद और फोन का विवरण दर्ज कराने का अनुरोध करें। Search/seizure की प्रक्रिया को BNSS धारा 105 के तहत audio-video माध्यम से रिकॉर्ड करने का प्रावधान है।
⚠️ एक महत्वपूर्ण अंतर
फोन लेना ≠ फोन का हर निजी डेटा मनमाने ढंग से पढ़ना।
Electronic records—including smartphone में मौजूद messages और अन्य digital records—कानून के तहत evidence हो सकते हैं। लेकिन उन्हें evidence के रूप में प्राप्त और इस्तेमाल करने के लिए लागू कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहती है।
अगर मामला वास्तविक है और पुलिस अभी आपके सामने PIN मांग रही है, तो बिना शारीरिक टकराव के वकील से तुरंत सलाह लेना सबसे सुरक्षित व्यावहारिक कदम है।
![]()