👂 नवजात बच्चे की सुनने की क्षमता कैसे जांची जाती है?
नवजात शिशु की सुनने की क्षमता की जांच जन्म के शुरुआती दिनों में ही की जा सकती है। इसके लिए बच्चे को आवाज सुनाकर केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होता कि वह प्रतिक्रिया देता है या नहीं।
मुख्य रूप से दो स्क्रीनिंग टेस्ट किए जाते हैं:
- OAE (Otoacoustic Emissions) — कान में एक छोटा उपकरण लगाकर ध्वनि दी जाती है और अंदरूनी कान से बनने वाली प्रतिक्रिया रिकॉर्ड की जाती है।
- AABR/ABR (Automated Auditory Brainstem Response) — छोटे इलेक्ट्रोड लगाकर यह देखा जाता है कि ध्वनि के प्रति श्रवण तंत्रिका और मस्तिष्क का शुरुआती हिस्सा कैसी विद्युत प्रतिक्रिया देता है।
🏥 टेस्ट कब होना चाहिए?
आदर्श रूप से सुनने की स्क्रीनिंग जन्म के 1 महीने के भीतर होनी चाहिए। यदि स्क्रीनिंग में समस्या आए तो आगे की जांच कराकर जरूरत पड़ने पर 3 महीने की उम्र तक सुनने की कमी की पुष्टि और 6 महीने तक हस्तक्षेप शुरू करने का लक्ष्य रखा जाता है।
अगर बच्चा स्क्रीनिंग में पास न हो, तो इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि बच्चा बहरा है—दोबारा स्क्रीनिंग और विशेषज्ञ जांच की आवश्यकता हो सकती है
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