🏛️ क्या Supreme Court संसद द्वारा बनाए गए कानून को रद्द कर सकता है?
हाँ। Supreme Court संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून को असंवैधानिक घोषित कर सकता है, यदि वह संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करता पाया जाए। इसे Judicial Review (न्यायिक समीक्षा) कहा जाता है।
⚖️ यह कैसे होता है?
- संसद कानून बनाती है।
- कोई व्यक्ति, संस्था या सरकार उस कानून को अदालत में चुनौती दे सकती है।
- Supreme Court कानून की संवैधानिकता की जांच करता है।
- यदि कानून संविधान के विरुद्ध पाया जाता है, तो Court उसे पूरी तरह या उसके किसी हिस्से को अमान्य कर सकता है।
- ऐसा होने पर वह संबंधित प्रावधान लागू नहीं किया जा सकता।
संविधान का Article 13 कहता है कि मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला कानून, उस सीमा तक, void (अमान्य) होगा।
📌 लेकिन Supreme Court संसद की जगह कानून नहीं बनाता
Supreme Court का काम यह देखना है कि कानून संविधान के अनुरूप है या नहीं। संसद कानून बनाने वाली संस्था है, जबकि अदालत उसकी संवैधानिक वैधता की समीक्षा कर सकती है।
सरल उदाहरण:
👉 संसद → कानून बनाती है
👉 नागरिक/संस्था → कानून को चुनौती देती है
👉 Supreme Court → संविधान के आधार पर समीक्षा करता है
👉 असंवैधानिक प्रावधान → अमान्य घोषित हो सकता है
इसीलिए भारत में संविधान सर्वोच्च है—संसद और न्यायपालिका दोनों संविधान की सीमाओं के भीतर काम करते हैं।
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