झारखंड में परीक्षा विवाद
झारखंड परीक्षा विवाद: हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रदर्शन, पुलिस-छात्र झड़प में FIR
रांची, 23 अगस्त 2026: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद और तेज हो गया है। परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक के बाद प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। इसके बाद पुलिस ने मामले में FIR दर्ज की है। हालांकि, उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार 11 नहीं, बल्कि 14 नामजद लोगों और 200 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ तीन FIR दर्ज की गई हैं।
क्या है पूरा विवाद?
झारखंड सरकार ने कथित अनियमितताओं के आधार पर 22 भर्ती परीक्षाओं/चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। इसके अलावा छह परीक्षाओं को रोकने और 17 पुरानी JPSC भर्तियों की CID जांच का निर्णय लिया गया था।
इस फैसले से एक तरफ परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग कर रहे छात्रों को उम्मीद जगी, लेकिन दूसरी तरफ उन अभ्यर्थियों में नाराजगी फैल गई जिनका चयन हो चुका था और जिन्हें अपनी नौकरी जाने का डर था।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
20 अगस्त को झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार के परीक्षा/नियुक्ति रद्द करने के फैसले पर रोक लगाई। अदालत ने प्रथम दृष्टया कहा कि नियमित नियुक्तियों को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना समाप्त नहीं किया जा सकता।
अदालत के आदेश के बाद चयनित अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली, लेकिन परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों ने इस फैसले पर असंतोष जताया और आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।
प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ?
21 अगस्त को रांची में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारी निर्धारित रूट का पालन नहीं कर रहे थे और सरकारी काम में बाधा डालने की स्थिति बनी। वहीं, प्रदर्शनकारी पक्ष ने पुलिस कार्रवाई और झड़प के लिए अलग दावे किए हैं। इन आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच के बाद होगा।
झड़प के बाद 22 अगस्त को रांची के कोतवाली थाने में तीन FIR दर्ज की गईं। इनमें 14 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 200 से अधिक लोगों को अज्ञात आरोपी बनाया गया है।
आंदोलन का मुद्दा क्या है?
छात्र संगठनों की मुख्य मांगें हैं:
- भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच।
- JPSC और JSSC की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता।
- पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई।
- निर्दोष चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी सुरक्षित रखना।
- भर्ती प्रक्रिया में ऐसी व्यवस्था बनाना जिससे भविष्य में विवाद और पेपर लीक की घटनाएं रोकी जा सकें।
राजनीतिक विवाद भी बढ़ा
मामले ने झारखंड की राजनीति को भी प्रभावित किया है। विपक्ष ने सरकार पर छात्रों और नौकरी के अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार का रुख कथित भर्ती अनियमितताओं पर कार्रवाई और व्यवस्था को साफ करने पर केंद्रित रहा है।
निष्कर्ष
झारखंड का परीक्षा विवाद अब भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता, चयनित युवाओं के रोजगार और छात्र आंदोलन के अधिकार—तीनों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है। हाईकोर्ट की रोक से चयनित अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच और छात्रों की मांगों का समाधान अभी बाकी है।