गांधी जी शाकाहारी या फिर गैर शाकाहारी ?
महात्मा गांधी पूरी तरह से शाकाहारी (Vegetarian) थे। उन्होंने अपने जीवन में अहिंसा के सिद्धांतों को मानते हुए हमेशा शाकाहारी भोजन ही अपनाया और इस विषय पर ‘[द मोरल बेसिस ऑफ वेजिटेरिइज्म]’ (The Moral Basis of Vegetarianism) नाम से पुस्तक भी लिखी।
बचपन और लंदन जाने का प्रभाव
- बचपन की जिज्ञासा: अपनी बाल्यावस्था में जिज्ञासा या दोस्तों के प्रभाव में आकर उन्होंने कुछ गुप्त अवसरों पर मांस का स्वाद चखा था, लेकिन उन्हें इसका अहसास होने पर बहुत पछतावा हुआ।
- माता को दिया वचन: जब गांधी जी वकालत की पढ़ाई के लिए लंदन जा रहे थे, तब उनकी माता पुतलीबाई ने उनसे मांस और मदिरा से दूर रहने की कसम ली थी। उन्होंने जीवनभर इस वादे का सख्ती से पालन किया।
खान-पान से जुड़े प्रयोग
- सादा और सात्विक भोजन: गांधी जी बेहद सादा भोजन पसंद करते थे जिसमें उबली हुई सब्जियां, दाल-चावल, ताजे फल और बकरी का दूध शामिल था।
- स्वास्थ्य और विचार: वे मानते थे कि शाकाहारी भोजन से मन शांत और सात्विक रहता है, जो शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी जरूरी है।