मोदी का आर्थिक सुधारों पर जोर
मोदी सरकार का आर्थिक सुधारों पर जोर: ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ से विकसित भारत का लक्ष्य
नई दिल्ली, 22 अगस्त 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक विकास को तेज करने के लिए तेजी से आर्थिक और संरचनात्मक सुधार लागू करने पर जोर दिया है। 21 अगस्त को Economic Times World Leaders Forum में मोदी ने कहा कि भारत अब ऐसे दौर में है जहां सुधारों की गति और बढ़ाई जाएगी। उन्होंने इसे ‘Reform Express’ की दिशा में आगे बढ़ता भारत बताया।
सरकार के सुधार एजेंडे में क्या शामिल है?
मोदी सरकार का मौजूदा आर्थिक सुधार एजेंडा मुख्य रूप से निवेश, विनिर्माण, रोजगार, कारोबार को आसान बनाने और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका मजबूत करने पर केंद्रित है।
1. लाइसेंस राज से इंसेंटिव आधारित व्यवस्था
मोदी ने पुराने ‘Licence Raj’ की आलोचना करते हुए कहा कि पहले उत्पादन बढ़ाने पर भी कंपनियों को कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ता था। इसके विपरीत सरकार Production Linked Incentive (PLI) जैसी योजनाओं के जरिए उत्पादन बढ़ाने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन देने की कोशिश कर रही है।
2. Ease of Doing Business पर फोकस
सरकार ने कारोबार शुरू करने, लाइसेंस, टैक्स, कस्टम, भूमि रिकॉर्ड और सरकारी मंजूरियों जैसी प्रक्रियाओं को डिजिटल और सरल बनाने पर जोर दिया है। PIB के अनुसार, इन सुधारों में single-window clearances, डिजिटल land records, compliance reduction और छोटे प्रक्रियात्मक अपराधों के decriminalisation जैसे कदम शामिल हैं।
3. GST और टैक्स सुधार
GST को भारत के बड़े आर्थिक सुधारों में शामिल किया जाता है। सरकार के अनुसार, 2017 में GST लागू होने के बाद अलग-अलग अप्रत्यक्ष करों की व्यवस्था को एकीकृत किया गया। 2025 के GST सुधारों में टैक्स संरचना को और सरल बनाने तथा अनुपालन लागत कम करने पर जोर दिया गया।
4. Manufacturing और ‘Make in India’
मोदी ने हाल में भारत के लिए मजबूत manufacturing base को जरूरी बताया है। उनका जोर केवल तैयार उत्पाद बनाने पर नहीं बल्कि components, design से लेकर final manufacturing तक पूरी value chain भारत में विकसित करने पर है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक supply chains का भरोसेमंद हिस्सा बनाना है।
5. निवेश और विदेशी पूंजी
सरकार के अनुसार, 2014-25 के दौरान भारत में $748.38 billion का FDI आया। सरकार इसे आर्थिक सुधारों और निवेश-अनुकूल माहौल का परिणाम मानती है। हालांकि निवेश की गुणवत्ता, रोजगार सृजन और क्षेत्रवार वितरण को लेकर स्वतंत्र आर्थिक विश्लेषण भी महत्वपूर्ण है।
2026 में सुधारों की अगली दिशा
2026-27 के बजट में भी सरकार ने tax certainty, digital trade facilitation, compliance burden कम करने, customs सुधार और investor access को प्रमुखता दी है। इसके अलावा वित्तीय क्षेत्र, श्रम, GST, बैंकिंग और insolvency framework में भी बदलाव जारी हैं।
मोदी ने 15 अगस्त 2026 के स्वतंत्रता दिवस भाषण में भी ‘Next Level Reforms’ की जरूरत बताई और manufacturing, agriculture तथा अन्य क्षेत्रों में लगातार सुधार की अपील की।
क्या हैं बड़ी चुनौतियां?
आर्थिक सुधारों के बावजूद विशेषज्ञों के अनुसार भारत के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। इनमें भूमि सुधार, कारोबार से जुड़े compliance का बोझ, रोजगार निर्माण, निजी निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा शामिल हैं। हालिया आर्थिक विश्लेषणों में भी land reforms और ease of doing business को भारत की अगली विकास छलांग के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।
निष्कर्ष
मोदी सरकार की आर्थिक रणनीति अब केवल GDP growth तक सीमित नहीं दिखाई देती। इसका जोर कम नियमों वाली व्यवस्था, डिजिटल शासन, manufacturing, निवेश, exports और वैश्विक supply chain में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने पर है।
सरकार इसे ‘Viksit Bharat @2047’ की दिशा में जरूरी कदम मानती है। हालांकि इन सुधारों की वास्तविक सफलता का आकलन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि नए रोजगार, निजी निवेश, MSME growth, उत्पादकता और आम लोगों की आय में वास्तविक बढ़ोतरी से होगा।