क्या भारत सरकार ने इसरो को बेच दिया है?
नहीं। ISRO को बेचा या निजीकरण नहीं किया गया है। ISRO अभी भी भारत सरकार के Department of Space (DoS) के अधीन है। ISRO की आधिकारिक वेबसाइट भी इसे Department of Space, Government of India का प्रमुख संगठन बताती है।
फिर “ISRO का निजीकरण” वाली खबर क्यों आ रही है?
असल में सरकार ISRO को बेच नहीं रही, बल्कि अंतरिक्ष क्षेत्र में Private Companies की भूमिका बढ़ा रही है।
- 🚀 ISRO धीरे-धीरे रॉकेट और सैटेलाइट की बड़े पैमाने पर routine manufacturing से पीछे हटकर R&D, नई तकनीक और बड़े वैज्ञानिक मिशनों पर ज्यादा ध्यान देने की दिशा में बढ़ रहा है।
- 🛰️ SSLV (Small Satellite Launch Vehicle) की technology और production rights HAL को bidding process के बाद transfer किए जा चुके हैं।
- आगे PSLV और LVM3 के production में भी private sector की बड़ी भूमिका होने की योजना बताई गई है।
- सरकार का तर्क है कि इससे ISRO research और advanced missions पर ध्यान देगा, जबकि commercial manufacturing बड़े पैमाने पर industry कर सकेगी।
⚖️ विवाद क्या है?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 24 अगस्त 2026 को आरोप लगाया कि सरकार ISRO और अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण को बहुत आगे बढ़ा रही है।
वहीं केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसका विरोध करते हुए कहा कि ISRO को कमजोर नहीं किया जा रहा, बल्कि “ISRO + Industry” मॉडल के जरिए भारत का space ecosystem बढ़ाया जा रहा है।
❌ ISRO बेचा गया: नहीं
❌ ISRO किसी निजी कंपनी को दिया गया: नहीं
✅ ISRO सरकारी संस्था है: हाँ
✅ Private companies को space sector में ज्यादा काम मिल रहा है: हाँ
✅ कुछ ISRO technologies का production/private-sector transfer हो रहा है: हाँ
✅ ISRO का future focus R&D और बड़े space missions पर बढ़ रहा है: हाँ
इसलिए “ISRO बिक गया” कहना गलत है। सही बात यह है कि भारत के space sector में निजी कंपनियों की भूमिका तेजी से बढ़ाई जा रही है और ISRO का operational/manufacturing role कुछ क्षेत्रों में बदला जा रहा है।