मणिपुर में विरोध प्रदर्शन
मणिपुर में विरोध प्रदर्शन: NRC से पहले Census की मांग को लेकर बढ़ा तनाव
इंफाल | 21 अगस्त 2026
मणिपुर में National Register of Citizens (NRC) को अपडेट करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि राज्य में 2027 की Census प्रक्रिया शुरू होने से पहले NRC को अपडेट किया जाए। आंदोलन के कारण कई इलाकों में बंद, सड़क अवरोध और शैक्षणिक संस्थानों के बंद रहने की स्थिति बनी है।
प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?
मणिपुर में प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है:
“पहले NRC, फिर Census।”
प्रदर्शनकारी संगठनों का तर्क है कि जनगणना से पहले राज्य में नागरिकों और आबादी का सही सत्यापन होना चाहिए। उनका दावा है कि कथित अवैध प्रवासन और जनसांख्यिकीय बदलाव से जुड़े सवालों को सुलझाए बिना Census और उसके बाद होने वाली delimitation की प्रक्रिया शुरू करना उचित नहीं होगा।
छात्रों ने भी किया प्रदर्शन
20 अगस्त को बड़ी संख्या में स्कूल और कॉलेज छात्रों ने इंफाल में प्रदर्शन किया। छात्रों ने NRC को अपडेट करने की मांग के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों को बंद किए जाने का भी विरोध किया।
रिपोर्टों के अनुसार, छात्र थाउ ग्राउंड, थांगमीबंद से मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे थे।
छात्रों का कहना है कि राज्य की जनसांख्यिकीय स्थिति और भविष्य की राजनीतिक प्रतिनिधित्व व्यवस्था को लेकर स्पष्टता जरूरी है।
48 घंटे का बंद
NRC की मांग को लेकर Campaign for Just and Fair Delimitation (JFD) ने 48 घंटे के बंद का आह्वान किया।
बंद के दौरान कई जगह:
- दुकानें बंद रहीं
- सड़क यातायात प्रभावित हुआ
- सड़क अवरोध की घटनाएं हुईं
- सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ
- प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच कुछ स्थानों पर तनाव हुआ
रिपोर्टों के अनुसार आंदोलन में छात्रों के साथ-साथ महिला विक्रेताओं और नागरिक संगठनों ने भी भाग लिया।
स्कूल और कॉलेज क्यों बंद किए गए?
मणिपुर सरकार ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए 20 से 22 अगस्त 2026 तक स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद रखने का आदेश दिया।
सरकार का कहना है कि मौजूदा तनावपूर्ण परिस्थितियों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
इस फैसले का कुछ छात्र समूहों ने विरोध भी किया है।
Census पर क्या असर पड़ा?
प्रदर्शन के बीच मणिपुर सरकार ने Census officials के training programme को भी स्थगित किया।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदर्शनकारी Census से पहले NRC updation की मांग कर रहे हैं।
अर्थात विवाद केवल सड़क प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर प्रशासनिक तैयारियों पर भी पड़ रहा है।
सुरक्षा बलों के साथ झड़प
प्रदर्शनों के दौरान कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव की स्थिति बनी।
रिपोर्टों के अनुसार, इंफाल ईस्ट के New Checkon इलाके में रात के समय झड़प हुई और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए tear gas तथा stun guns का इस्तेमाल किया। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी सामने आए हैं।
कुछ दिन पहले Census प्रक्रिया के विरोध के दौरान दो छात्रों के घायल होने की भी पुलिस ने जानकारी दी थी।
राजनीतिक विवाद
मणिपुर में NRC और Census का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का भी विषय बन गया है।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर मणिपुर के लोगों की मांगों को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि यदि केंद्र इच्छाशक्ति दिखाए तो मणिपुर से जुड़े मुद्दों को हल किया जा सकता है।
दूसरी ओर, NDA से जुड़े कुछ विधायकों के दिल्ली में केंद्र सरकार से मुलाकात करने की योजना की भी खबरें हैं।
इससे संकेत मिलता है कि NRC, Census और delimitation का मुद्दा अब राज्य की राजनीति के साथ-साथ केंद्र-राज्य संबंधों में भी महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य चिंता क्या है?
प्रदर्शनकारियों की चिंता मुख्य रूप से तीन मुद्दों के आसपास है:
1. जनसांख्यिकीय बदलाव
प्रदर्शनकारी कथित अवैध प्रवासन और उससे होने वाले जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि नागरिकों का सत्यापन जरूरी है।
2. राजनीतिक प्रतिनिधित्व
Census के आंकड़े भविष्य की delimitation और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि Census से पहले नागरिकता और आबादी से जुड़े रिकॉर्ड स्पष्ट हों।
3. स्थानीय पहचान
प्रदर्शनकारियों का एक वर्ग मानता है कि NRC के माध्यम से राज्य की मूल आबादी और नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड को स्पष्ट करने से स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा में मदद मिल सकती है।
क्या सभी मणिपुरवासी NRC की मांग कर रहे हैं?
ऐसा कहना सही नहीं होगा।
वर्तमान विरोध प्रदर्शन मुख्यतः कुछ नागरिक संगठनों, छात्रों और अन्य समूहों द्वारा NRC-before-Census की मांग को लेकर हो रहे हैं।
मणिपुर में अलग-अलग समुदायों और क्षेत्रों की राजनीतिक तथा सामाजिक मांगें अलग रही हैं। इसलिए पूरे राज्य की जनता की एक समान राय के रूप में इस आंदोलन को प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
पृष्ठभूमि: मणिपुर का पुराना संकट
मणिपुर पहले से ही 2023 से चले आ रहे गंभीर जातीय संघर्ष के प्रभाव से जूझ रहा है।
Meitei और Kuki-Zo समुदायों के बीच हिंसा ने राज्य में बड़े पैमाने पर विस्थापन और सामाजिक विभाजन पैदा किया है। इस पृष्ठभूमि में पहचान, सुरक्षा, भूमि, नागरिकता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे अत्यंत संवेदनशील हो गए हैं।
इसी कारण NRC और Census का मुद्दा भी केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि राज्य की भविष्य की राजनीति और जनसांख्यिकी से जोड़कर देखा जा रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
आने वाले दिनों में तीन बातें महत्वपूर्ण होंगी:
पहला, क्या केंद्र सरकार NRC की मांग पर कोई स्पष्ट निर्णय लेती है?
दूसरा, क्या Census से पहले NRC updation को लेकर कोई आधिकारिक प्रक्रिया शुरू होती है?
तीसरा, क्या आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहता है या बंद और सड़क अवरोध के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ती है?
मणिपुर में वर्तमान विरोध प्रदर्शन का तत्काल मुद्दा NRC को Census से पहले अपडेट करने की मांग है। आंदोलनकारियों का कहना है कि नागरिकता और जनसंख्या रिकॉर्ड स्पष्ट होने के बाद ही Census और delimitation जैसी प्रक्रियाएं आगे बढ़नी चाहिए।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि एक तरफ Census और प्रशासनिक प्रक्रिया को समय पर आगे बढ़ाया जाए, वहीं दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों की चिंताओं और राज्य की संवेदनशील कानून-व्यवस्था की स्थिति को भी संबोधित किया जाए।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है: क्या मणिपुर में 2027 Census से पहले NRC की मांग पर केंद्र और राज्य सरकार कोई स्पष्ट रास्ता निकाल पाएंगी?
स्थिति तेजी से बदल रही है और आने वाले दिनों में सरकार के फैसले तथा प्रदर्शनकारियों की अगली रणनीति इस विवाद की दिशा तय कर सकती है।