PMLA Review: सुप्रीम कोर्ट में 2022 के फैसले की दोबारा समीक्षा क्यों?
PMLA Review: सुप्रीम कोर्ट में 2022 के फैसले की दोबारा समीक्षा क्यों?
नई दिल्ली | 21 अगस्त 2026
सुप्रीम कोर्ट ने Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002 से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में 2022 के अपने फैसले की समीक्षा वाली याचिकाओं को सुनने के लिए नई तीन-सदस्यीय पीठ गठित की है। यह घटनाक्रम Enforcement Directorate (ED) की गिरफ्तारी, तलाशी, जब्ती और संपत्ति कुर्क करने जैसी शक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई पीठ की अध्यक्षता CJI सूर्यकांत करेंगे। उनके साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना होंगे। यह बदलाव सभी पक्षों की सहमति के बाद किया गया।
मामला क्या है?
यह समीक्षा याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट के 27 जुलाई 2022 के Vijay Madanlal Choudhary v. Union of India फैसले से जुड़ी हैं।
2022 में सुप्रीम कोर्ट की तीन-जजों की पीठ ने PMLA की कई महत्वपूर्ण धाराओं और ED की व्यापक शक्तियों को बरकरार रखा था। उस फैसले को चुनौती देने वाली 241 याचिकाओं पर फैसला आया था।
उस फैसले के बाद कई याचिकाकर्ताओं ने समीक्षा की मांग की।
2022 के फैसले में क्या बरकरार रखा गया था?
2022 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने PMLA की कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं को वैध माना था, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- Section 19 — ED की गिरफ्तारी की शक्ति
- Sections 5 और 8(4) — संपत्ति की provisional attachment और उससे संबंधित व्यवस्था
- Sections 15 और 17 — search और seizure की शक्तियां
- Section 24 — कुछ परिस्थितियों में burden of proof का आरोपी की ओर स्थानांतरण
- Section 45 — PMLA मामलों में bail की कड़ी twin conditions
इन प्रावधानों को चुनौती देने वालों का तर्क था कि इनसे आरोपी के मौलिक अधिकार और निष्पक्ष प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
अब समीक्षा क्यों महत्वपूर्ण है?
2022 के फैसले के बाद समीक्षा याचिकाओं में कई मुद्दे उठाए गए।
लेकिन शुरुआती चरण में सुप्रीम कोर्ट की ओर से खास तौर पर दो मुद्दों पर दोबारा विचार की संभावना सामने आई:
1. ECIR की कॉपी आरोपी को देना
PMLA मामलों में ED द्वारा तैयार किया गया Enforcement Case Information Report (ECIR) FIR के समान नहीं माना गया था।
2022 के फैसले में कहा गया था कि ECIR की कॉपी आरोपी को देना अनिवार्य नहीं है।
समीक्षा याचिकाओं में इस स्थिति पर दोबारा विचार की मांग की गई है। अगस्त 2022 में समीक्षा याचिकाओं पर नोटिस जारी करते समय तत्कालीन पीठ ने भी इस निष्कर्ष को दोबारा देखने की आवश्यकता का संकेत दिया था।
2. Presumption of innocence और Section 24
दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा Section 24 PMLA है।
समीक्षा याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि कुछ परिस्थितियों में आरोपी पर burden of proof डालने से presumption of innocence के सिद्धांत पर असर पड़ सकता है।
सरकार ने 2025 में सुप्रीम कोर्ट के सामने कहा था कि समीक्षा की सुनवाई उन दो मुद्दों से आगे नहीं जानी चाहिए जिन्हें 2022 में नोटिस जारी करते समय मौखिक रूप से चिन्हित किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने इस सीमित दायरे का विरोध किया था।
क्या PMLA को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित किया है?
नहीं।
यह बात स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है।
2022 के Vijay Madanlal Choudhary फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने PMLA की कई महत्वपूर्ण धाराओं की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था। 2026 में शुरू हुई प्रक्रिया उस फैसले की review है; इसका अर्थ यह नहीं है कि PMLA या ED की सभी शक्तियां पहले ही रद्द कर दी गई हैं।
नई पीठ क्यों बनाई गई?
20 अगस्त 2026 को CJI सूर्यकांत ने बताया कि यदि पहले वाली पीठ ही मामले को सुनती रहती तो अन्य चल रही पीठों को पुनर्गठित करना पड़ता।
इसलिए सभी पक्षों की सहमति से नई पीठ बनाई गई:
CJI सूर्यकांत
जस्टिस जॉयमाल्या बागची
जस्टिस वी. मोहना
अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई की तारीख बाद में तय की जाएगी।
ED की शक्तियों पर इसका क्या असर हो सकता है?
फिलहाल ED की शक्तियों पर कोई रोक नहीं लगी है।
लेकिन यदि समीक्षा में सुप्रीम कोर्ट 2022 के किसी महत्वपूर्ण निष्कर्ष को बदलता है, तो PMLA मामलों में जांच और आरोपियों के अधिकारों से जुड़े नियमों पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
खासकर इन मुद्दों पर असर पड़ सकता है:
गिरफ्तारी: आरोपी को गिरफ्तारी के आधार और प्रक्रिया के बारे में क्या जानकारी दी जानी चाहिए?
ECIR: क्या आरोपी को ECIR की कॉपी उपलब्ध कराना जरूरी होगा?
Bail: PMLA की कठोर bail conditions को अदालत किस तरह लागू करेगी?
Burden of proof: आरोपी पर प्रमाण का भार डालने की सीमा क्या होगी?
Search और seizure: ED की जांच शक्तियों पर न्यायिक safeguards कितने मजबूत होंगे?
आम नागरिक के लिए इसका क्या मतलब है?
PMLA सामान्य आपराधिक कानून से अलग एक विशेष कानून है जिसका उद्देश्य money laundering और अपराध से प्राप्त संपत्ति से निपटना है।
कानून के तहत ED को जांच के दौरान महत्वपूर्ण शक्तियां प्राप्त हैं।
इसलिए इस review का मूल सवाल केवल ED बनाम आरोपी नहीं है।
यह एक बड़े संवैधानिक सवाल से भी जुड़ा है:
आर्थिक अपराधों से लड़ने के लिए जांच एजेंसी को कितनी शक्तियां दी जाएं और साथ ही आरोपी के व्यक्तिगत स्वतंत्रता, निष्पक्ष सुनवाई और due process के अधिकारों की कितनी सुरक्षा हो?
यही संतुलन PMLA review को महत्वपूर्ण बनाता है।
क्या 2026 में PMLA का पूरा कानून बदल जाएगा?
अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अभी केवल review petitions की सुनवाई के लिए नई पीठ बनाई है। अंतिम निर्णय आने तक 2022 का Vijay Madanlal Choudhary फैसला लागू रहेगा।
इसलिए वर्तमान स्थिति यह है:
PMLA लागू है।
ED की मौजूदा वैधानिक शक्तियां लागू हैं।
2022 का फैसला अभी प्रभावी है।
लेकिन उसके कुछ महत्वपूर्ण निष्कर्षों की समीक्षा सुप्रीम कोर्ट करेगा।
PMLA Review 2026 भारत के criminal justice system और आर्थिक अपराधों की जांच के लिए एक महत्वपूर्ण संवैधानिक परीक्षा हो सकती है।
2022 में सुप्रीम कोर्ट ने ED को PMLA के तहत व्यापक शक्तियां देने वाली व्यवस्था को largely बरकरार रखा था। अब समीक्षा में अदालत यह देख सकती है कि उस फैसले के कुछ हिस्सों—विशेषकर ECIR की कॉपी आरोपी को देने और burden of proof से जुड़े मुद्दों—पर दोबारा विचार की आवश्यकता है या नहीं।
सबसे महत्वपूर्ण बात:
यह अभी कोई नया फैसला नहीं है कि ED की शक्तियां खत्म हो गईं। यह 2022 के PMLA फैसले की समीक्षा की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण अगला चरण है। अंतिम असर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और उसके निर्णय पर निर्भर करेगा।