सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला — Labour Code
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 1978 की ‘Industry’ परिभाषा और नए Labour Code पर क्या बदला?
नई दिल्ली | 21 अगस्त 2026
सुप्रीम कोर्ट ने “Industry” की कानूनी परिभाषा को लेकर करीब पांच दशक पुराने विवाद पर बड़ा फैसला सुनाया है। 20 अगस्त 2026 को नौ-जजों की संविधान पीठ ने State of Uttar Pradesh v. Jai Bir Singh मामले में 1978 के ऐतिहासिक Bangalore Water Supply & Sewerage Board v. R. Rajappa फैसले की समीक्षा की।
इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1978 के फैसले को पूरी तरह खत्म नहीं किया। बहुमत ने माना कि उसमें दिए गए “triple test” के कुछ हिस्सों में सुधार की जरूरत है। हालांकि, Industrial Disputes Act, 1947 के तहत लंबित मामलों में 1978 वाला triple test ही लागू रहेगा।
1978 में क्या फैसला हुआ था?
1978 में सुप्रीम कोर्ट की सात-जजों की पीठ ने Bangalore Water Supply मामले में “industry” शब्द की व्यापक व्याख्या की थी।
इस व्याख्या के तहत केवल पारंपरिक कारखाने या व्यावसायिक संस्थान ही नहीं, बल्कि कई ऐसी संस्थाएं भी “industry” के दायरे में आ सकती थीं जहां employer और employee मिलकर व्यवस्थित तरीके से goods या services उपलब्ध कराते हैं।
इसी फैसले में एक “triple test” विकसित हुआ, जिसका इस्तेमाल यह तय करने में किया जाता था कि कोई गतिविधि “industry” है या नहीं।
2026 के फैसले में क्या बदला?
सुप्रीम कोर्ट की बहुमत राय ने कहा कि 1978 के triple test का मूल ढांचा उपयोगी है, लेकिन उसके कुछ हिस्सों को बेहतर तरीके से formulate करने की आवश्यकता है।
इसलिए कोर्ट ने test को refine/reformulate किया है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि 1978 का फैसला पूरी तरह खत्म हो गया।
लंबित मामलों में 1978 का मूल triple test लागू रहेगा। अंतिम रूप से तय हो चुके मामलों को भी इस फैसले के कारण दोबारा नहीं खोला जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल: 2020 Labour Code पर क्या असर?
यही इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Industrial Relations Code, 2020 में “industry” की अपनी अलग कानूनी परिभाषा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस नए Code की परिभाषा को 1978 के Bangalore Water Supply फैसले के आधार पर तय करने से जानबूझकर परहेज किया।
CJI Surya Kant की राय के अनुसार 1978 का फैसला नए Industrial Relations Code की व्याख्या का “sheet anchor” नहीं बनेगा।
इसका मतलब है कि भविष्य में जब अदालतें Industrial Relations Code, 2020 की “industry” परिभाषा की व्याख्या करेंगी, तो उन्हें नए Code के अपने शब्दों, उद्देश्य और संदर्भ को देखना होगा।
इसका कर्मचारियों पर क्या असर पड़ सकता है?
इस फैसले का तत्काल प्रभाव समझने के लिए दो अलग-अलग स्थितियों को देखना जरूरी है।
1. पुराने कानून के लंबित मामले
Industrial Disputes Act, 1947 के तहत जो मामले अभी लंबित हैं, उनमें 1978 का Bangalore Water Supply triple test लागू रहेगा।
इससे पुराने मामलों में कर्मचारियों के अधिकारों और industrial dispute remedies की निरंतरता बनी रहेगी।
2. नए Labour Code के तहत भविष्य के मामले
Industrial Relations Code, 2020 के तहत आने वाले मामलों में 1978 के फैसले को स्वतः लागू नहीं माना जाएगा।
नए Code में “industry” की परिभाषा को अलग से पढ़ा और समझा जाएगा।
इसलिए यह कहना कि “सुप्रीम कोर्ट ने Labour Code में 1978 की industry definition को खत्म कर दिया” पूरी तरह सही नहीं होगा।
सही बात यह है कि कोर्ट ने कहा है कि 2020 Code की व्याख्या अपने स्वतंत्र statutory text और context के आधार पर होगी।
फैसले में मतभेद भी सामने आया
यह फैसला पूरी तरह एकमत नहीं था।
बहुमत ने माना कि 1978 के triple test में कुछ सुधार जरूरी हैं। वहीं कुछ न्यायाधीशों ने माना कि 1978 का Bangalore Water Supply फैसला सही था और उसे बदलने की आवश्यकता नहीं थी।
Justice B.V. Nagarathna ने अलग राय देते हुए 1978 की व्यापक व्याख्या को बनाए रखने का समर्थन किया।
सरकार और कर्मचारियों के लिए इसका महत्व
“Industry” की परिभाषा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह तय होता है कि कौन-सी संस्था और कौन-सी गतिविधियां industrial relations कानून के दायरे में आती हैं।
इसका सीधा संबंध कर्मचारियों के लिए उपलब्ध dispute-resolution mechanisms, retrenchment और employment-related protections से हो सकता है।
2020 का Industrial Relations Code पुराने Industrial Disputes Act, 1947, Trade Unions Act, 1926 और Industrial Employment (Standing Orders) Act, 1946 को एक framework में समाहित करने वाला कानून है।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का 20 अगस्त 2026 का फैसला भारतीय labour law के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे केवल “1978 की definition खत्म” या “Labour Code में workers के अधिकार खत्म” जैसे सरल निष्कर्ष के रूप में देखना सही नहीं होगा।
फैसले का सार तीन बिंदुओं में है:
पहला: 1978 का Bangalore Water Supply triple test पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
दूसरा: Industrial Disputes Act, 1947 के लंबित मामलों में 1978 वाला test लागू रहेगा।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण: Industrial Relations Code, 2020 में “industry” की व्याख्या 1978 के फैसले को आधार बनाकर स्वतः नहीं की जाएगी; नए Code को उसके अपने text और context के आधार पर interpret किया जाएगा।
इसलिए इस फैसले को भारतीय labour law में पुराने कानून और नए Labour Code के बीच एक महत्वपूर्ण कानूनी विभाजन के रूप में देखा जा सकता है।