⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में NSA के तहत हिरासत से जुड़े मामले में क्या फैसला दिया?
29 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने संबल हिंसा मामले में Mulla Afroz की NSA (National Security Act, 1980) के तहत की गई preventive detention को रद्द कर दिया। पीठ में जस्टिस Dipankar Datta और Sheel Nagu शामिल थे।
मुख्य बातें
- NSA detention रद्द — सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को भी रद्द कर दिया, जिसने detention को बरकरार रखा था।
- पुलिस हिरासत में कथित confession पर सवाल — कोर्ट ने कहा कि पुलिस हिरासत में दिया गया confession अपने-आप में preventive detention का आधार नहीं बनाया जा सकता। Detaining authority को अन्य प्रासंगिक सामग्री और परिस्थितियों पर भी विचार करना जरूरी है।
- UP सरकार पर ₹10 लाख लागत — सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार पर ₹10 लाख की costs लगाई।
- रिहाई का निर्देश — कोर्ट ने कहा कि Afroz को रिहा किया जाए, जब तक किसी अन्य मामले में उनकी हिरासत आवश्यक न हो।
- यह criminal case का फैसला नहीं है — सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय मुख्य रूप से NSA preventive detention की वैधता पर है। इससे 2024 की Sambhal हिंसा से जुड़े मूल आपराधिक आरोपों का अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
सरल भाषा में
सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा कि Sambhal हिंसा के आरोप सही या गलत हैं। उसने कहा कि किसी व्यक्ति को NSA के तहत preventive detention में रखने के लिए कानून के अनुसार पर्याप्त और वैध आधार होना चाहिए; केवल पुलिस हिरासत में कथित confession उस detention का अकेला आधार नहीं हो सकता।
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