उत्तराखंड के 20 ऐसे औषधीय पौधों की सूची बनाओ जो अब दुर्लभ/संकटग्रस्त हैं
उत्तराखंड में कई हिमालयी औषधीय पौधे दुर्लभ, अत्यधिक संग्रह के दबाव में या संकटग्रस्त हैं। इन्हें “अब बिल्कुल नहीं मिलते” कहना सही नहीं होगा—कई प्रजातियाँ अभी भी कुछ ऊँचाई वाले क्षेत्रों में मिलती हैं, लेकिन उनकी प्राकृतिक आबादी पर दबाव है। उत्तराखंड के आधिकारिक/सरकारी स्रोतों और वैज्ञानिक अध्ययनों में कई ऐसी प्रजातियाँ दर्ज हैं।
🌿 उत्तराखंड के 20 दुर्लभ/संकटग्रस्त औषधीय पौधे
| # | पौधा | वैज्ञानिक नाम | स्थिति/मुख्य चिंता |
|---|---|---|---|
| 1 | 🌿 अतीस | Aconitum heterophyllum | संकटग्रस्त; जड़ों का अत्यधिक संग्रह |
| 2 | 🌿 कुटकी | Picrorhiza kurroa | अत्यधिक संग्रह के कारण दबाव |
| 3 | 🌿 जटामांसी | Nardostachys jatamansi | अत्यधिक संग्रह; उच्च खतरा |
| 4 | 🌿 कुठ/कुट | Saussurea costus | Critically Endangered |
| 5 | 🌿 वनककड़ी/बक्काकरी | Podophyllum hexandrum | दुर्लभ हिमालयी औषधीय पौधा |
| 6 | 🌿 चिरायता | Swertia chirayita | प्राकृतिक आबादी पर संग्रह का दबाव |
| 7 | 🌿 सालम पंजा | Dactylorhiza hatagirea | अत्यधिक संग्रह के कारण खतरा |
| 8 | 🌿 कुटकी की एक अन्य स्थानीय प्रजाति/समूह | Picrorhiza spp. | उच्च हिमालय में सीमित वितरण |
| 9 | 🌿 अतीस की अन्य प्रजाति | Aconitum violaceum | Vulnerable श्रेणी में दर्ज |
| 10 | 🌿 अतीस/एकोनाइट | Aconitum balfourii | उत्तराखंड की प्राथमिकता वाली प्रजाति |
| 11 | 🌿 कुटकी/जड़ी-बूटी समूह | Gentiana kurroo | संकटग्रस्त औषधीय प्रजाति |
| 12 | 🌿 सुगंधबाला/जटामांसी समूह | Valeriana jatamansi | प्राकृतिक आवास पर दबाव |
| 13 | 🌿 दालचीनी/तेजपात समूह | Cinnamomum tamala | प्राकृतिक संसाधनों पर संग्रह का दबाव |
| 14 | 🌿 अर्क/हिमालयी औषधीय प्रजाति | Angelica glauca | Endangered के रूप में दर्ज |
| 15 | 🌿 गुग्गुल | Commiphora wightii | गंभीर संरक्षण चिंता; प्राकृतिक आबादी में कमी |
| 16 | 🌿 रतनजोत | Arnebia benthamii | पुराने उत्तराखंड आकलनों में अत्यधिक संकटग्रस्त |
| 17 | 🌿 लाल/हिमालयी रतनजोत | Arnebia euchroma | Endangered के रूप में दर्ज |
| 18 | 🌿 ब्रह्मकमल | Saussurea obvallata | Vulnerable; उच्च हिमालय में सीमित |
| 19 | 🌿 हिमालयी रेवंदचीनी | Rheum webbianum | Vulnerable के रूप में दर्ज |
| 20 | 🌿 हिमालयी रेवंद | Rheum spiciforme | Vulnerable के रूप में पुराने आकलनों में दर्ज |
उत्तराखंड के Herbal Research and Development Institute (HRDI) ने अतीस, कुटकी, कुठ, जटामांसी, चिरायता और वनककड़ी सहित कई प्रजातियों को राज्य में खेती के लिए प्राथमिकता दी है—यह भी दिखाता है कि इन पौधों का संरक्षण और नियंत्रित खेती महत्वपूर्ण है।
विशेष रूप से जटामांसी (Nardostachys jatamansi) और कुटकी (Picrorhiza kurroa) पर उत्तराखंड के हालिया अध्ययन में उच्च खतरे की पहचान की गई है। वहीं Saussurea costus को IUCN में Critically Endangered बताया गया है और यह CITES Appendix I में भी सूचीबद्ध है।
महत्वपूर्ण: “संकटग्रस्त” का अर्थ यह नहीं कि पौधा उत्तराखंड से पूरी तरह खत्म हो चुका है। उदाहरण के लिए Wildlife Institute of India के सर्वेक्षण में जटामांसी, कुटकी, अतीस और वनककड़ी जैसी प्रजातियों के संरक्षण के लिए विशेष क्षेत्रों की पहचान की गई है।
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