बेरोजगारी मापने के लिए भारत में कौन-कौन से आँकड़े इस्तेमाल किए जाते हैं?
भारत में बेरोजगारी मापने के लिए मुख्य रूप से सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के National Statistics Office (NSO) द्वारा किए जाने वाले Periodic Labour Force Survey (PLFS) के आँकड़ों का इस्तेमाल होता है। PLFS रोजगार और बेरोजगारी की स्थिति का भारत का प्रमुख आधिकारिक स्रोत है।
📊 बेरोजगारी मापने के प्रमुख आँकड़े
| आँकड़ा | इसका मतलब |
|---|---|
| Unemployment Rate (UR) | श्रम बल में शामिल लोगों में से कितने लोग काम नहीं कर रहे लेकिन काम की तलाश/उपलब्धता रखते हैं |
| Labour Force Participation Rate (LFPR) | 15+ आबादी में कितने लोग काम कर रहे हैं या काम खोज रहे हैं |
| Worker Population Ratio (WPR) | 15+ आबादी में वास्तव में कितने लोग काम कर रहे हैं |
| Current Weekly Status (CWS) | पिछले 7 दिनों में व्यक्ति की रोजगार स्थिति |
| Usual Status (PS+SS) | पिछले 365 दिनों की सामान्य रोजगार स्थिति |
MoSPI के अनुसार, UR = बेरोजगार व्यक्ति ÷ श्रम बल × 100। वहीं LFPR में काम करने वाले और काम तलाशने/काम के लिए उपलब्ध लोगों को शामिल किया जाता है।
🕐 2025 से महत्वपूर्ण बदलाव
जनवरी 2025 से PLFS की पद्धति बदली गई है। अब LFPR, WPR और UR के मासिक अनुमान ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए Current Weekly Status (CWS) में जारी किए जाते हैं। वार्षिक स्तर पर Usual Status और CWS दोनों के आँकड़े भी उपलब्ध होते हैं।
आसान उदाहरण:
अगर 100 लोग श्रम बल में हैं और उनमें 6 लोग काम की तलाश में हैं लेकिन उन्हें काम नहीं मिला, तो Unemployment Rate = 6% होगा।
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